इस स्वतंत्रता के क्या मायने है मेरी नज़र में......🖋️🖋️🖋️🖋️
यूँ तो स्वयं में ही है स्वतंत्र होना अप्रतिम
सूखा निवाला भी आज़ादी का भाये प्रतिमन
फिर भी क्यों न विचार किया जाए
स्वतंत्र होकर हम क्या पाए ?
पाए नहीं तो क्या हो सकता है हासिल ?
क्या अपनी क्षमता भुना पाए हमारे क़ाबिल ?
यूँ तो व्यक्ति उठता है ऊपर अपनी लगन से
पर उभरने की परिस्थितियाँ पाता है वतन से
आज़ादी के साथ ही अनगिनत सपनों का हुआ उद्भव
धर्म, जाति, भाषा, वर्ग, क्षेत्र से ऊपर निकलना हुआ संभव
भारत एक राष्ट्र ही नहीं एक ख्वाहिश है
जहाँ आप इंसान है बस इतना ही काफ़ी है
तभी तो आपके एक मत की इतनी है शक्ति
राष्ट्र के शासन की नींव है आपकी अभिव्यक्ति
स्वतंत्रता है अगर स्वयं को जाना जाए
उत्कृष्टता की सीढ़ी को मापा जाए
अभी भी है चहुँ ओर बेबसी और मज़बूरी
क्यों न पुरुषार्थ से हो इससे मीलों की दूरी
ज़रूरत है राष्ट्र को वैज्ञानिक सोच की
और साथ में अटूट जज़्बे और जोश की
उन्माद ही नहीं है मतलब राजनीति का
शांति से उत्थान हो हर किसी का
इसी मन्त्र को अपना कर चले भारत का युवा
इस स्वतंत्रता दिवस है इतनी सी चाह मात्र
अपनी योग्यता के अनुसार पाये पात्र!
