Thursday, January 28, 2021

Friday, January 15, 2021

Sunday, December 6, 2020

तेरा आना

 कश्मीर लाल डेढ़ की धरती है, लाल डेढ़ हिंदुस्तान की चुनिंदा woman mystic संत poet में से एक है। कश्मीर में मेरे प्रवास के दौरान मुझे उर्दू poetry का शौक परवान चढ़ा! यूं तो शुरू शुरू में मुझे रोमांस या इश्क के उर्दू poetry में बोलबाले से थोड़ी आपत्ति थी। लेकिन इश्क अपने आप में एक खूबसूरत अहसास है। इसी अहसास पर मैने आज यह speed poetry की है। उम्मीद है आपकी रूह तक पहुंचेगी!


हकीकत की दुनिया चलती रहेगी, आप ख्वाबों में तो मेरे हो जाओ

हम ख्वाबों से बसर कर लेंगे आप एक बार सामने तो आओ

यूं फूल से खिले रहो , हमारी बहार सदाबहार हो जाती है

पतझर का डर नही मुझे, डर है सावन के बीते जाने का

कश्ती प्यार की लेके बैठा हूं, इंतजार है आपके आने का

इनकार से इंतजार बुरा, क्योंकि हमे पता है आपका इनकार झूठा होगा

 एक बार आके तो देखो हमारा प्यार अनूठा होगा

इंतजार भी इंतजार करके रूठ गया है

जल्दी आओ, बहुत कीमती वक्त छूट गया है

आओगे जब तुम, हम फना हो जाएंगे

तुम्हारे दिल में हम धड़केंगे सांसों में रवा हो जायेंगे

नायाब हो तुम , इतना जान लो

हम ही अपने है, ये पहचान लो

एक एक पल तुम्हारे साथ फिरदौस है

हमें कौसर की चाहत नही, जब से तुम में मदहोश हैं



अपने नूर को अक्सर हीरा भुला देता है

तराशना पड़ता है तब कोहिनूर होता है

तुम कोहेनुर मत बनना, जौहरी तुम्हे देख के बेहोश होता है

ये तो कुछ भी नही, हम इतना चाहेंगे तुम्हे

भूल जाओगी खुद को और ढूंढोगी रब में

मैं तलाश रहा था तुम्हे सदियों से

जमाना बीत गया दुनिया की हंसियो में

पर अभी तुम्हे यही रहना है मेरे दिल में

 बहुत हिफाजत से रहोगी वहां

हैरान हो जाओगी शान ओ उल्फत से

यूं हैरान ना हुआ करो, नायाब हो तुम

बस समझ लो ये कायनात है तुम में गुम

ये रिवायतें तो यूं ही चलती रहेगी, इनसे ना घबराना

कभी ना कभी तो पड़ेगा ही तुम्हे मेरी राहों में आना

यूं ही नही दिल मिलते हैं, ये रूहानियत की दुनिया है

आपकी कशिश से रौशन जिंदगी हो बस इतनी ही तो कमियां है

यूं ही नही मिले तुम मुझे , इस में रब का हाथ है 

अब तो वो भी नहीं रोक सकता, ऐसा मेरा साथ है

तुम यूं खींची चली आओगी, रुक ना पाओगी

ये चाहत ऐसी है, एक नई लौ जलाओगी

जिंदगी रौशन हो जायेगी और बांछे खिल जायेगी

तेरे मेरे मिलने से दुनिया बदल जायेगी



तुम्हारी दुआ में असर है ये उसे भी पता है

जो सब देख रहा है फिर भी लापता है

कैसे ना तुम मिलोगी मुझे हमारे मिलने में उसी की रजा है

यूं ही नहीं मरने की बात किया करो तुम, तुम्हे नहीं पता है

तुम्हारे जीने में कितनो की नमाज अता है

ये इश्क नहीं इबादत है, इसे कुछ और ना समझना

दुनिया तन तक सिमटी, हमारे प्यार में रूह ही फना

 तुम सनम नहीं हो खुदा हो



तुम भूल गए हो तुम्हे कहां पता है

हम याद दिलाएंगे तुम्हे, की ये जिंदगी नही तुम्हारी अदा है

दिल का हाल बताते रहा करो, चुप ना हुआ करो

हमारी सांसे रुक जाती हैं कुछ तो दया करो

लफ्जों का खेल नहीं है ये, रूह करती बयां है

तुम्हारे आने से ही हमारे ख्यालों में नशा है

यूं तो आम सी जिंदगी जीते रहे हम

पर तुम्हारे आने से कुछ और ही समा है

तुम जब काग़ज़ पर कायनात रंग देती हो

तुम्हे नहीं पता रब भी सोच में पड़ जाता है

मैने ऐसा आलम क्यों नही बनाया, क्या है इसमें जो मेरी खता है

तेरी मेरी मोहब्बत को जी ले, इतनी कुव्वत जमाने में नहीं है

हम कोई और वक्त जी रहे हैं, ये समय बस दिखाने में अभी है

कितना तुम मुझे चाहती हो, में अंदाजा नहीं लगा सकता

मैं बस अंदाजा लगा सकता हूं , पैमाना नहीं बता सकता

इस अहसास को संजो के रख लेना, वक्त की तल्खियों में काम आएगा

ये एहसास ही जिंदगी है, वरना मौत पे क्या किसी का नाम आएगा

यूं लफ्ज़ ऐसे ही नहीं भूलती तुम, सोच की हद के पार है

ऐसी मुहब्बत है हमारी, ये किसी और दुनिया का प्यार है

जादू तो कुछ भी नहीं, बशर का खेल है बस

असली करामात तो ये है, जो तेरे दिल में प्यार है

पर्दे की बात नहीं है, यूं तो तुम बेपर्दा हो

बस मुझे तुम्हे यूं ही नहीं देखना

तुम फरिश्ता हो, तुमसे मिलने की कुछ तो कीमत होनी चाहिए

ऐसे सवाल हमसे ना किया करो

ज़रा अपने जेहन में झांको तुम्हे सब पता है

कीमत न लगाओ हमारे इश्क की, कीमत बाजारों में लगती है

तुम तो पीर हो जिसकी चादरें मजारों पे लगती हैं

कुछ तो बोलो यूं ना चुप हो जाया करो

तेरे मेरे मिलने में करिश्मा है, इसे यूं ना जाया करो

यूं तो ज़हर भी पी लेता तुम्हारे इश्क में

पर तुम साथ हो तो जाम ए कौसर आ गया हाथ में

ये सिर्फ आज की बात नहीं, कल भी रहेगी

हमारी मोहब्बत रहेगी , हस्ती रहेगी या ना रहेगी

तुम चाहती जो हो हमें बताया करो

हमें वैसे भी पता है पर छुपाया ना करो

तेरी खामोशी में जरूर सुकून है

पर तेरे चुप रहने से मेरे लफ्जों में कहां दम है

अब आ भी जाओ छुपने से प्यास और बढ़ती है

तेरे मेरे बीच की दूरी और घटती है

Tuesday, October 20, 2020

Jealousy

 

जब भी मेरा मन विचलित होता है , मेरी कोशिश रहती है कुछ लिखने की , और मैं फिर वही हँसमुख, शांत हो जाता हूँ।  आज अचानक ही मन में आया क्यों न rapidfire poetry की जाय। अब तक मैंने जितनी भी poetry की है वो काफी सोच समझ कर की है।  पर यह ठीक वैसे ही है जैसे गायक एक ही साँस में गीत गाते है , आशा है आपको अच्छी लगेगी।  थीम है 'ईर्ष्या' । जहाँ तक मैंने देखा है 'ईर्ष्या या जलन ' मनुष्य की सबसे स्वाभाविक प्रवृतियों  में एक है।  कुछ लफ्ज़ ईर्ष्या पर भी

 

दूसरे का  सुख देख कर ईर्ष्या होती है

लगता है  मेरी ही किस्मत खोटी है

पर अपनी चाह अपनी मंज़िलें ही मुझे साफ नहीं

दूसरों सी जिंदगी पाने को, क्या दूसरों की तरह नहीं होना  होगा मुझे भी

मेरा जीवन , मेरा संघर्ष सब मेरा अपना है

मेरे जैसा जीवन  पाना भी तो कईओ का सपना है

बस यहीं पर हम सभी सभी हार जाते हैं

दुनिया में तरह तरह  के सिकंदर तो बार बार आते हैं

आते हैं जाते हैं , जाने कितनों को दुःखी कर जाते हैं

मेरा जीवन भी उसी विजेता जैसा हो

इसी उधेड़ बुन में बहुत लोग जीना भूल जाते हैं

मज़ा तो तब आता है ,

जब अपने जैसे साधारण लोगो को देख कर भी मन ललचाता है

उनमें कुछ अलग बात  है यह बताता है

जबकि अलग सिर्फ इतना है कि वो अलग हैं

तभी हमें लगता है उनके पास सब है

ठीक है , आदर्शों के पीछे भागो

पर जो है उसको तो पूरा जिओ अभागों

एक स्वप्निल जीवन  एक ही तरह जिया जाए

ऐसा तो मुमकिन नहीं

जितने अनुभव हैं , संभव हैं उतनी तरह की ज़िन्दगी भी

क्यों होनी जीवनधारा स्वतंत्र और आज़ाद बहे

क्या ईर्ष्या ,  क्या द्वेष , क्या अपेक्षाएं इनसे बच के रहे

कई बार तो ऐसा होता है , जो जितना प्यारा हो उतना ही दुःख देता है

वह हमारी ही सोच अनुसार चले मूल कारण यही होता है

तीन वक़्त का खाना , सर ऊपर छत और डर से दूर मन

अगर इतना कुछ आज है  तो फिर क्यों सोचे अविरल

इच्छाओं की सीमा नहीं , ये तो बढे और बदले पल पल

ऊपर से  एक से बढ़कर एक महानुभाव सामने आते हैं

उनके कारनामें देख कर , हँसे या चिंतन करें विचलित हो जाते हैं

कोई ऐसा मन्त्र ढूंढें , अपने  ही अपने में मगन रहूं

आदर्श जिंदगी 'वो भी मेरी कल्पना की ' की चाह में हरदम रहूं

खुश होने का तो एक ही कारन काफी है

दुखी होने के लिए तो पूरी दुनिया भी कम पड़ जाती है

सच में , इस बात में बड़ा दम है

जो अपने मन पर काबू पाए , वो किसी से कम है

जीवन जैसे चलाता रहे , चलते रहो

ज्यादा विपरीत जाने की कोशिश करो

क्योंकि नदी को आखिर बहना ही है

सागर तक पहुंचना ही है

पहाड़ो की जवानी से , सागर के बुढ़ापे तक

वह बहती है , इसीलिए पूजी जाती है

करोड़ों को जीवन अमृत पहुंचाती है

अगर अपने धर्म - प्रकृति से अगर वह हट जाये

तो फिर नदी क्यों कहलाये

तो महानुभाव, जैसा जीवन आये जी लो

खूब मजे लूटो वर्त्तमान के , कुछ भविष्य के सपने लो

पर भूत -भविष्य में इतना भी खोना नहीं

की अभी मैं कहाँ हूँ , इसका  ठिकाना नहीं

बड़े बड़े राजों से लेकर फ़क़ीर तक

कोई नहीं गया कुछ लेकर

सुनने में ये बात बेवकूफी है  लगती

पर 16 आने सच है, झुठला सकते नहीं

एक साधारण सी जिंदगी भी बढ़िया जी जा सकती है

क्या असाधारण है , ये भी हमारी अपनी सोच की कृति है

आनंदमय रहो , क्यों इतना तोल, मोल-भाव

खुल के जिओ यही है अपना प्राकृतिक स्वभाव

 

----------------------------प्रिंस कादयान

Sunday, September 27, 2020

Passion of Shams Tabrez


 किसी भी कौम की तरक्की का पैमाना , मेरे हिसाब से , यह होता है की वह एक आज़ाद इंसान की आज़ादी को किस हद तक पनपने की इज़ाज़त दे सकती है। तभी western सोसाइटी को आला माना जाता है और हर कोई वहां जाकर अपने सपने का जहाँ बसाना चाहता है। पर एक खास बात है , यह तरक्की west ने यूँ ही नहीं पायी , हक़ या सच्चाई के लिए बहुत से सिरफिरों ने अपनी जान की बाज़ी लगायी। बूढ़े गैलिलियो को सच्चाई बताने के लिए चर्च ने जेल में डाला। सुकरात को ज़हर दिया गया। इसा मसीह को सूली पे भी चढ़ाया गया।

पर चूँकि आजकल मुझे उर्दू से लगाव हुआ है तो आजका ख्याल जिनके बारे में है - वह है 'शम्स तबरेज़'! शम्स तबरेज़ को बादशाह ने काफिर ठहराकर मारने का फरमान दे दिया था, इसलिए कि उन्होंने 'अन -अल -हक़ ' (I AM THE TRUTH ) का नारा दिया था। और इसे खुदा की तौहीन माना गया। बादशाह को आज कोई नहीं जानता , पर शम्स और उनके उनके मुरीद 'रूमी ' को आज हज़ार साल बाद भी दुनिया मानती है। शम्स जैसे सरफिरों का वो क्या जज़्बा और जुनूँ रहा होगा - बस इसी को ढूंढ़ने की कोशिश करते चंद लफ्ज़ !

आतिश से आतिश जलती रहेगी
आब -ओ -आँधियाँ ज़ोर लगा लें
कुतब तारा भटकों का रहनुमा रहेगा
ज़माना चाहे लाख गलत राह दिखा ले
राहें चिराग-ए -बदर से रौशन रहेंगी
बादल आवारगी में चाहे खुद को भुला लें
रूह तो मेरी अज़ल तक आज़ाद रहेगी
बदन पे चाहे बेड़ियाँ लाख सजा लें
इदाराये मेरी बंदगी की मोहताज़ रहेंगी
यूँ ही नहीं 'अन-अल -हक़ ' लब पर आया मेरे
तुम्हारी मुखालिफत मिटा सकती नहीं मुझे
मैं 'शम्स' हूँ , मेरी रौशनी तो क़यामत तक नायाब रहेगी

- प्रिंस

कुछ मुश्किल लफ्ज़ो के मायने इस तरह हैं
आतिश - fire /आग ;आब -पानी /water ; कुतब - pole star /ध्रुव तारा ; चिराग-ए -बदर - पुरे चाँद का दिया lamp of full moon ;अज़ल -eternity ; इदाराये - traditional religion / मज़हब ;अन-अल -हक़ - I AM THE TRUTH ;बंदगी - devoutness / धार्मिक प्रवृत्ति ; मुख़ालिफत - enmity /दुश्मनी ;शम्स -sun /सूरज ; नायाब - unique/अतुल्य

Friday, September 18, 2020

 अगर कोई ज़बान जज़्बातो की ज़ुबान तो वह है उर्दू ज़बान। उर्दू साहित्य की आवाज़ सीधा दिल से दिल में जाती है। पर मैंने एक खास बात देखी है उर्दू संसार में - इश्क़ का बोलबाला -भले ही वो माशूक के लिए हो या ख़ुदा के लिए ! मेरे जानने वाले उर्दू शाइरों में मुझे फैज़ अहमद फैज़ ही ऐसे दिखे जो कुछ बातें इश्क़ से बाहिर भी करते हैं। जैसे कि उनकी नज़्म - 'हम देखेंगे', या 'बोल की लब आज़ाद हैं तेरे ' - थोड़ा इंकलाबी सुरूर !पर फैज़ ने भी इश्क़बाज़ी को खूब अपनी कृतियों  में इस्तेमाल किया है जैसे - 'मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरे मेहबूब न मांग'। कई बार तो आलम ये होता है कि उर्दू शायरी का नाम लेते ही 'सस्ती बीमार आशिकी ' की तस्वीर तस्सव्वुर होती है। मेरी दिली चाह है की मैं उर्दू में ऐसा काम करूँ जो आज के ज़माने से ताल्लुक रखती हो और कुछ नए पहलुओं को भी छुए ।  बस इसी कड़ी में यह कृति - थीम थोड़ी ऐसी है - 'जब आप किसी नए कोशिश पर निकलते है तो खुद को तैयार कैसे करते हैं !'


वक़्त की तासीर को इतना समझना है मुझे 

कि घडी की तहरीक का अंदाज़ बदल जायेगा 

यूँ तो तुम्हारी आजमाइशों का दौर पुराना है 

पर इस बार तीर तरकश से निकल जायेगा 

यूँ तो मंज़र खूब डरावने भेजे तुमने

पर अब ख़ौफ़ का साया दिल से निकल जायेगा 

यूँ तो हर बार रिवायतों से मात खाता रहा मैं 

पर अब ज़माने का दस्तूर पता चल जायेगा 

यूँ तो ज़ज़्बा ही रहा है अब तक  हमसफ़र मेरा 

पर अब अम्लियत से भी वाक़िफ़ हो जाऊंगा 

कुछ ऐसी तमन्ना करके निकले है सरफ़रोश घर से 

की तूफां साहिल से खुद ही किनारा करके निकल जायेगा 



अभी तो यह शुरुआत है , धीरे धीरे उर्दू लफ्ज़ो को मैं सीख रहा हूँ और इस कड़ी को समय मिलते ही आगे बढ़ाऊंगा! 


ऊपर इस्तेमाल किये गए कुछ मुश्किल  लफ़्ज़ों के मायने इस तरह हैं। तासीर - प्रकृति /nature , तहरीक- चाल /movement , मंज़र -situation ,रिवायत -tradition ,अम्लियत - व्यावाहरिक /practical ...............................................................प्रिंस




Saturday, August 15, 2020

स्वतंत्रता के मायने

 

इस स्वतंत्रता के क्या मायने है मेरी नज़र में......🖋️🖋️🖋️🖋️


यूँ तो स्वयं में ही है स्वतंत्र होना अप्रतिम 

सूखा निवाला भी आज़ादी का भाये प्रतिमन 

फिर भी क्यों न विचार किया जाए 

स्वतंत्र होकर हम क्या पाए ?

पाए नहीं तो क्या हो सकता है हासिल ?

क्या अपनी क्षमता भुना पाए हमारे क़ाबिल ?

यूँ तो व्यक्ति उठता है ऊपर अपनी लगन से 

पर उभरने की परिस्थितियाँ पाता है वतन से 

आज़ादी के साथ ही अनगिनत सपनों का हुआ उद्भव 

धर्म, जाति, भाषा, वर्ग, क्षेत्र से ऊपर निकलना हुआ संभव 

भारत एक राष्ट्र ही नहीं एक ख्वाहिश है 

जहाँ आप इंसान है बस इतना ही काफ़ी है

तभी तो आपके एक मत की इतनी है शक्ति 

राष्ट्र के शासन की नींव है आपकी अभिव्यक्ति 

स्वतंत्रता है अगर स्वयं को जाना जाए

उत्कृष्टता की सीढ़ी को मापा जाए 

अभी भी है चहुँ ओर बेबसी और मज़बूरी   

क्यों न पुरुषार्थ से हो इससे मीलों की दूरी  

ज़रूरत है राष्ट्र को वैज्ञानिक सोच की 

और साथ में अटूट जज़्बे और जोश की 

उन्माद ही नहीं है मतलब राजनीति का 

शांति से उत्थान हो हर किसी का 

इसी मन्त्र को अपना कर चले भारत का युवा 

इस स्वतंत्रता दिवस है इतनी सी चाह मात्र 

अपनी योग्यता के अनुसार पाये पात्र!