Sunday, September 27, 2020

Passion of Shams Tabrez


 किसी भी कौम की तरक्की का पैमाना , मेरे हिसाब से , यह होता है की वह एक आज़ाद इंसान की आज़ादी को किस हद तक पनपने की इज़ाज़त दे सकती है। तभी western सोसाइटी को आला माना जाता है और हर कोई वहां जाकर अपने सपने का जहाँ बसाना चाहता है। पर एक खास बात है , यह तरक्की west ने यूँ ही नहीं पायी , हक़ या सच्चाई के लिए बहुत से सिरफिरों ने अपनी जान की बाज़ी लगायी। बूढ़े गैलिलियो को सच्चाई बताने के लिए चर्च ने जेल में डाला। सुकरात को ज़हर दिया गया। इसा मसीह को सूली पे भी चढ़ाया गया।

पर चूँकि आजकल मुझे उर्दू से लगाव हुआ है तो आजका ख्याल जिनके बारे में है - वह है 'शम्स तबरेज़'! शम्स तबरेज़ को बादशाह ने काफिर ठहराकर मारने का फरमान दे दिया था, इसलिए कि उन्होंने 'अन -अल -हक़ ' (I AM THE TRUTH ) का नारा दिया था। और इसे खुदा की तौहीन माना गया। बादशाह को आज कोई नहीं जानता , पर शम्स और उनके उनके मुरीद 'रूमी ' को आज हज़ार साल बाद भी दुनिया मानती है। शम्स जैसे सरफिरों का वो क्या जज़्बा और जुनूँ रहा होगा - बस इसी को ढूंढ़ने की कोशिश करते चंद लफ्ज़ !

आतिश से आतिश जलती रहेगी
आब -ओ -आँधियाँ ज़ोर लगा लें
कुतब तारा भटकों का रहनुमा रहेगा
ज़माना चाहे लाख गलत राह दिखा ले
राहें चिराग-ए -बदर से रौशन रहेंगी
बादल आवारगी में चाहे खुद को भुला लें
रूह तो मेरी अज़ल तक आज़ाद रहेगी
बदन पे चाहे बेड़ियाँ लाख सजा लें
इदाराये मेरी बंदगी की मोहताज़ रहेंगी
यूँ ही नहीं 'अन-अल -हक़ ' लब पर आया मेरे
तुम्हारी मुखालिफत मिटा सकती नहीं मुझे
मैं 'शम्स' हूँ , मेरी रौशनी तो क़यामत तक नायाब रहेगी

- प्रिंस

कुछ मुश्किल लफ्ज़ो के मायने इस तरह हैं
आतिश - fire /आग ;आब -पानी /water ; कुतब - pole star /ध्रुव तारा ; चिराग-ए -बदर - पुरे चाँद का दिया lamp of full moon ;अज़ल -eternity ; इदाराये - traditional religion / मज़हब ;अन-अल -हक़ - I AM THE TRUTH ;बंदगी - devoutness / धार्मिक प्रवृत्ति ; मुख़ालिफत - enmity /दुश्मनी ;शम्स -sun /सूरज ; नायाब - unique/अतुल्य

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